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अब जो आदमी इस काम के लिए भी खड़ा नहीं हो सकता हो तो उसे आलसियों का राजा बना देना चाहिए।
इन भाई साहब ने तो अपनी सच्ची भावनायें बता दी हैं!
इस भाई साहब के लिए खाने से ज़्यादा ज़रूरी मोबाइल है, तभी तो यह हाल है!
स्वछता में कुछ योगदान यह टॉयलेट बनाने वाला का भी है।
गरमी में दे ठंडी की ऐहसास
अगर इंसानियत खत्म हो गयी है तो और ले आते हैं।
कहने को तो यह चेतावनी का बोर्ड है लेकिन इशारा कुछ और ही कहता है।
सीधी-सीधी बात है, कोई बकवास नहीं!
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